"Good Samaritans", Tangrain Parish



For English click "Good Samaritans"

कोविड -19 की दूसरी लहर ने भारत के अधिकांश हिस्सों को तबाह कर दिया था। जैसे वह देश के कोने-कोने में अपने पंख फैला रहा था; लोग हर दिन हजारों की संख्या में मर रहे थे, खासकर युवा। इतनी बड़ी संख्या में मौतें देखना बहुत दर्दनाक था। ईसाइयों के लिए अपने फादरों और सिस्टरों की मौत की खबर सुनना और भी दर्दनाक था। लोगों ने कल्पना भी नहीं की होगी कि कोरोना महामारी से लोगों की हलातें ऐसी मनहूस स्थिति में आ जाएगी। कुछ हद तक यह हमारी सरकारों की तैयारी की कमी के कारण हुआ, चाहे वह राज्य हो या केंद्र। लोगों के मन में शोक और भय छा गया। सोशल मीडिया ने महामारी के बारे में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन यह जागरूकता से ज्यादा डर लेकर आया। जाने-अनजाने ज्यादातर लोगों ने बिना वेरिफाई (जाँच) किए ही कोविड-19 से जुड़े संदेशों को फॉरवर्ड कर दिया। ग्रामीण भारत के लोगों ने वीडियो और संदेशों के माध्यम से जो कुछ भी सुना और देखा, उस पर विश्वास किया। इसलिए, उन्होंने डर के कारण कोविड परीक्षण (covid test) के लिए भी जाने से इनकार कर दिया। कुछ ग्रामीणों और यहां तक कि कस्बों के लोगों ने भी टीका लगवाने से साफ इनकार कर दिया। उनका डर यह था कि कोरोना के मरीज सिर्फ अस्पतालों में मर रहे हैं न कि घरों में या गांवों में। उन्हें यह भी डर सताता है कि जब कोई मरीज अस्पताल जाता है तो वह जिंदा घर वापस नहीं आता है। उनके पास अफवाह है कि रोगियों से शरीर के अंग निकाले जाते हैं, और उन्हें मृत घोषित कर दिया जाता है। उन्हें यह भी डर सताता है कि टीका धीमी मौत लाता है, वे नपुंसक हो जाते हैं आदि; विशेष रूप से ग्रामीणों में इस तरह की कई अफवाहें महामारी और इसके टीकाकरण के बारे में है।
ऐसी स्थिति में, राउरकेला कैथोलिक डायसिस के, आदरणीय बिशप किशोर कुमार कुजूर के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया जिसमें विभिन्न धार्मिक प्रमुख पुरुष और महिलाएं और शुभचिंतक शामिल थे। डायसिस ने प्रत्येक पल्ली के लिए पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर के दो सेट भी प्रदान किए और व्यक्तिगत पल्ली के युवाओं को गांव-गांव या घर-घर जाने की जिम्मेदारी दी गई, जो भी  उनके लिए सुविधाजनक था। वे ऑक्सीजन संतृप्ति (ऑक्सीजन स्तर/level), पल्स दर (pulse rate) और लोगों के शरीर के तापमान को मापने के लिए थे। उन्हें व्यक्ति को यह बताना/सूचित करना था कि क्या किसी का ऑक्सीजन स्तर सामान्य स्तर से नीचे है, नाड़ी दर और शरीर का तापमान सामान्य/मानक स्तर से काफी नीचे है या बहुत अधिक है। उन्हें लोगों को ब्यक्तिगत रूप से डॉक्टर को देखने या उनके पास मौजूद डॉक्टरों की सूची से ऑनलाइन परामर्श लेने का सुझाव देना था।
इस बात को ध्यान में रखते हुए Tangrain parish के युवाओं ने "Good Samaritans" नाम का एक समूह (group) बनाया, जिसमें इच्छुक और उदार युवा शामिल थे, किसी से किसी प्रकार की कोई जोर-जबरदस्ती नहीं। उन्होंने 31 मई 2021 को अपना मिशन शुरू किया और 17 जून 2021 को समाप्त किया। लगभग तीन सप्ताह लगातार वे पल्ली के हर गांव के घर-घर गए। Fr. Amit Lakra SJ और Sr. Pinki Rina Kullu FC उन युवाओं का साथ दिया। हमारे लोगों को बचाने के लिए उनके त्याग और निस्वार्थ सेवा को देखकर यह दिल को छू लेने वाला और वास्तव में बहुत उत्साहजनक था। उन्होंने लोगों को कोविड -19 परीक्षण (Covid test) और वैक्सीन के महत्व के बारे में जागरूकता और जागरूक भी किया। ऐसे युवाओं पर कोई भी खुशी और गर्व महसूस कर सकता है।

नीचे उनकी कड़ी मेहनत और कुछ आराम के पल की कुछ झलकियाँ हैं।




















Comments

Popular posts from this blog

The New Priests' Meet

'1 Day Recollection' for the youth of our parish

Youth: the hope of future